नानी बाई रो मायरो

दिव्यांग, अनाथ, रोगी, विधवा, वृद्ध एवं  बंचित जनों  के सेवा में सतत सेवारत

नारायण सेवा संस्थान एवं परोमों धर्म ट्रस्ट, उदयपुर

के सहायतार्थ के लिए
बाल व्यास राधास्वरूपा पूज्या

जया ‘किशोरी’ जी द्वारा

“नानी बाई रो मायरो”

दिनांक 2 अप्रैल 2018 से दिनांक 4 अप्रैल 2018 

10 बजे से दोपहर 2 बजे तक

जया किशोरी जी ने केवल 21 साल की उम्र में अपनी कथाओं और कीर्तन से अपनी लम्बी फॉलोअर लाइन बना ली है। राजस्थान के चूरू जिले की रहने वाली जया किशोरी

जया किशोरी जी ने केवल 21 साल की उम्र में अपनी कथाओं और कीर्तन से अपनी लम्बी फॉलोअर लाइन बना ली है। जया किशोरी जी ने इतनी कम उम्र में से साध्वी जया किशोरी बन चुकी हैं। उनकी आवाज में कथा सुनने हजारों की भीड़ उमड़ पड़ती है। लाखों लोग उनके फॉलोअर हैं।
राजस्थान के चूरू में गौड़ ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखने वाली जया किशोरी जी का जन्म कोलकाता में हुआ। उन्होंने कोलकाता के ही महादेवी बिरला सेकंडरी हाईस्कूल से 12वीं पास की। वे भवानीपुर गुजराती सोसाइटी कॉलेज की छात्रा हैं।
5 साल की उम्र से कथा-वाचन कर रही हैं। सिर्फ 9 साल की उम्र में ही जया किशोरी जी ने संस्कृत में लिंगाष्टकम्, शिव-तांडव स्तोत्रम्, रामाष्टकम् आदि कई स्तोत्रों को गाना शुरू कर दिया था।

बहुत कम वक्त में उन्होंने एक भागवत कथावाचक के तौर पर पहचान बना ली है। भागवत कथा-वाचन के लिए उन्हें दूसरे शहरों से भी बुलाया जाता है। उनके भजनों का बाकायदा एक ऐप भी है। जिसका नाम “जया किशोरी रेडियो” रखा गया है। इसके जरिए सीधे उनके फैन पेज और वेबसाइट तक पहुंचा जा सकता है। इसे अब तक करीब 5 हजार से ज्यादा लोग डाउनलोड भी कर चुके हैं।
भक्तों ने दिया किशोरी नाम
उनके घर का नाम जया शर्मा था। गुरुजी बचपन में राधा कहते थे। भक्तों ने “किशोरी” नाम दे दिया। जब से वे कार्यक्रम करने लगीं तो सभी साध्वी जया किशोरी कहने लगे। जया किशोरी जी  के दादाजी और दादीजी के साथ रहने और भक्ति का माहौल होने से बचपन में ही भगवान कृष्ण के लिए उनके मन में प्रेम जागृत हो गया। जया किशोरी जी ‘नानी बाई का मायरा, नरसी का भात’ कार्यक्रम करती हैं।