हमारे उद्देश्य एवं सपनों

संसार का शाश्वत सत्य है कि कोई भी कार्य बिना प्रायोजन नही किया जाता चाहे वह किसी भी क्षैत्र का हो। अन्य क्षैंत्रो में कार्य  विभिन्न श्रोंतो द्वारा समयावधी में सम्पन्न हो जाता है, परन्तु जहां तक लोक कल्याण कार्यो का सम्बन्ध है ये सब मात्र परमात्मा की दया कृपा एवं योग्य संत जनेा के तपबल एवं अथक प्रयत्न तथा आमजनों की निष्ठा एवं आस्था से जुड़े होते है। क्योंकि इनका उद्वेश्य ‘‘वसुधैव कुटुम्बकम्’’ अर्थात निस्वार्थ भाव से प्राणी मात्र की सेवा समर्पण व भाव रखकर करना है। इसी के साथ क्षैत्र के लोगो का भारतीय संस्कृति का दर्शन सुमार्ग पर चलना सिखाना होता है।

उपरोक्त विषयों को ध्यान मे रखते हुए वर्तमान में जा कार्य हो रहे है तथा भविष्य में होने जा रहे है वह निम्न प्रकार से है।
निम्न कार्यो में कुछ कार्य हो रहे है जिन्हे गति देना है।

  • संत सेवा
  • गौ सेवा
  • मूक प्राणियों के लिए चुग्गा पानी की व्यवस्था
  • वैदिक संस्कृत विद्यालय की स्थापना
  • गरीब निःशक्त जनों के लिए निःशुल्क शिक्षा
  • निःशुल्क चिकित्सा सेवा हेतू चिकित्सालय का निर्माण।
  • बालिका शिक्षा हेतू निःशक्त जनों  की संस्था प्रधानों  से जानकारी लेकर समय-समय पर सहायता देना।
  • आश्रम में समय -समय पर धार्मिक आयोजन करना (कथा, यज्ञादि करवाना)
  • आश्रम की स्थापना से ही अनवरत रामायण पाठ निरन्तर गतिमान रखना।
  • वर्षोत्सव आदि मौकों पर सांस्किृत कार्यक्रम कर आने वाली पीढि़यों को सुसंकृत बनाना।

उपरोक्त कार्यो को आगे बढ़ाने के लिए धर्म प्रेमियो को कोटिश – कोटिश धन्यवाद।

आशा करते हैं कि आगे भी आप श्री का अपनी विशुद्व   आय में से अंशदान देकर आप धर्म लाभ लेते  रहेंगे। क्योकि राष्ट्र कवि संत कबीर ने कहां है –
चिडि़ चोंच भर ले गई , नदी न घटयो नीर।
दान दिया धन न घटे , कह गये दास कबीर ।।

कोटि- कोटि धन्यवाद आपके जीवन की मंगलकामनाऐं करते हुए -‘‘ श्री सीताराम सेवा आश्रम ’’ बांसिया रोड़ ,  मोहरा कलां